Saturday, July 10, 2021

समय प्रबंधन || TIME MANAGEMENT

 समय प्रबंधन आज के समय में समय प्रबंधन एक बहुत ही आवश्यक एवं सबसे ज्यादा ध्यान से पूछे जाने वाले विषयों में सिर्फ एक है|  मुझसे कई ऐसे विद्यार्थी रोज मिलते हैं जिन्हें अपने जीवन में समय प्रबंधन को लेकर कई सवाल रहते हैं जैसे उनका यह सवाल रहता है की  समय प्रबंधन कैसे करें? किन किन बातों का ध्यान रखें? कई बार मैं उनको कहता हूं किस समय प्रबंधन वास्तविकता में प्राथमिकता का प्रबंधन है यानी  " समय प्रबंधन बराबर प्राथमिकता प्रबंधन।

आपको अगर अपने जीवन में समय को प्रतिबंधित करना हो यानी कि समय को बांटना हो अपने कार्य की प्राथमिकता के अनुसार तो आप पहले यह ध्यान दें कि आपके लिए सबसे प्राथमिक कार्य क्या है?

जैसे एक विद्यार्थी के लिए सबसे प्राथमिक कार्य है सुबह जल्दी उठना और जितनी जल्दी हो सके अपनी पढ़ाई की शुरुआत करना, एक पहलवान को चाहिए क्यों है जल्दी उठे और जितनी जल्दी हो सके अपने शारीरिक बल को बढ़ाने के लिए मेहनत करें वैसे ही एक ऑफिस में काम करने वाले युवक को चाहिए कि वह सही समय पर तैयार हो आज के दिन ऑफिस में होने वाले सभी मीटिंग के बारे में प्रिपरेशन करें और सही समय पर अपने ऑफिस पहुंचे वैसे ही सभी के जीवन में अलग-अलग प्राथमिकताएं होती हैं। आवश्यक रूप से यह तय करना है कि आपकी प्राथमिकता क्या है।

कोविड  के समय में समय प्रबंधन

आज लगभग 2 साल हो गए हैं पूरे विश्व में सभी लोग कोरोना महामारी की वजह से लॉकडाउन में अपने घरों पर बैठे हुए हैं हालांकि इस स्थिति में भी कई लोग ऑफिस के कार्यों से स्कूल के कार्यों से या अपने मनोरंजन के कार्य में व्यस्त तो है ही परंतु इसके बावजूद भी कहीं ना कहीं हमारे मन में यह है कि हम अपने समय का सही उपयोग नहीं कर पा रहे या फिर हम पहले से कुछ ज्यादा ही समय अन्य चीजों पर बर्बाद कर रहे हैं इन दोनों ही स्थिति में हमें हमेशा ध्यान रखना होगा   "समय मूल्यवान है हम समय को बचाकर नहीं रख सकते हम सिर्फ उसका सही उपयोग कर सकते है।"

तालाबंदी में भी कई लोगों ने अपने समय को सही जगह पर उपयोग करने के लिए कई उपाय ढूंढे हैं कुछ लोगों ने नहीं कलाओं को सीखने का प्रयास किया कुछ लोगों ने गार्डनिंग की कुछ लोगों ने पढ़ाई लिखाई में अपनी रुचि दिखाई कुछ लोगों ने साहित्य के क्षेत्र में अपना प्रयास किया सभी तरीके किसी ना किसी प्रकार से लोगों का मनोरंजन करते हैं साथ ही उनको भी बढ़ाते हैं

पर सबसे अधिक प्रभावित युवा वर्ग के विद्यार्थी रहे जैसा कि आप सभी जानते हैं कि हमारे देश में भी विद्यालय और कॉलेज बंद रहे फिर भी बच्चों ने डिजिटल माध्यम से पढ़ाई की और अभी भी अपनी पढ़ाई को जारी रखा है लेकिन यह हर प्रकार से अच्छा नहीं है बहुत समय तक मोबाइल या फिर कंप्यूटर या लैपटॉप जैसी डिजिटल स्क्रीन को देखने से बच्चों की आंखों और कान के साथ-साथ मस्तिष्क में भी कई प्रकार की समस्या उत्पन्न होती है हो सकती है

ऐसे में सभी चीजों के लिए वातावरण उचित होना चाहिए। 

Read more »

Labels: , , , ,

Friday, July 2, 2021

मोदी सरकार का पूरा हिसाब || Complete Analysis of MODI Government

 पीएम नरेंद्र मोदी ने 2014 में अधिक नौकरी, विकास और लालफीताशाही को  समाप्त करने का वादा करके भारत का सबसे बड़ा चुनाव जीता और सत्ता संभाली।
 2014 और फिर 2019 में उनकी पूर्ण बहुमत की सरकार ने बड़े सुधारों को लेकर उम्मीद बढ़ा दी थी। लेकिन उनके 10 सालों के प्रधानमंत्री कार्यकाल के दौरान आर्थिक आंकड़े बेहद फीके रहे हैं महामारी ने जिसे और खराब कर दिया और अर्थव्यवस्था का उम्मीद से भी खराब प्रदर्शन जारी है|

 प्रधान मंत्री मोदी के कार्यकाल में एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था ने कैसा प्रदर्शन किया।- 

सुस्त विकास -   

  1.  पीएम मोदी ने वादा किया था कि वह 2025 तक भारत की जीडीपी को 5 ट्रिलियन यानी 5 लाख करोड़ की बना देंगे उनका सपना अब अटका नजर आ रहा है। कोरोना महामारी से पहले यह माना गया था की  2025 तक 2.26 लाख पहुंचेगी |
  2. महामारी ने इसमें 200 से $300 की और कमी लादी| विशेषज्ञ मानते हैं की मुद्रास्फीती  और दुनिया भर में तेल के दामों का बढ़ना भी एक बड़ी चिंता का विषय है |
  3. नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री का पद संभाला था उस तमे भारत की जीडीपी फुल यानी साल से 8 फ़ीसदी पर थे जो 2019 की चौथी तिमाही के दौरान दशक के सबसे कम 3.1% पर आ गई ।
  4. साल 2016 में नोटबंदी ने 86% से अधिक नगद को चलन से बाहर कर दिया और नए टैक्स नियम जीएसटी ने व्यापार को तगड़ी मार पहुंचाई इन सब ने अभी बड़ी समस्याओं को जन्म दिया।
चरम पर बेरोजगारी-
  1.   Center for Monitering Indian Economy( CMIE) के CEO महेश व्यास कहते हैं कि भारत की सबसे बड़ी चुनौती निवेश में मंदी रही सत्ता बदलने के बाद 2016 से हमने कई आर्थिक झटके झेले हैं नोटबंदी जीएसटी9 सीजी आरटीओ रुक रुक कर लगाए गए।
  2.  लॉकडाउन ने रोजगार को कम कर दिया अंतिम आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार अंतिम तिमाही में बेरोजगारी अपने सबसे निचले स्तर यानी कि 45% पर रही|
  3.  सीएमआईई के अनुसार यह दर तब से अब तक लगभग दोगुनी हो चुकी है 2021 से लेकर अब तक लगभग साल 2021 की शुरुआत से अब तक दो दशक बाद 8 करोड़ से अधिक लोग अपनी नौकरी गंवा चुके हैं और 7.5 करोड़ लोग गरीबी रेखा पर पहुंच चुके हैं|
  4. जिनमें 10 करोड़ मध्यमवर्ग का एक तिहाई हिस्सा शामिल है विशेषज्ञ मानते हैं कि हर साल देश की अर्थव्यवस्था को दो करोड़ नौकरियां चाहिए लेकिन पिछले दशकों में भारत में हर साल केवल 33 लाख नौकरिया ही पैदा हो पाई हैं|
  5.  भारत निर्यात भी काफी नहीं कर पा रहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब मेक इन इंडिया का नारा दिया था तो यह माना जा रहा था की लालफीताशाही को समाप्त करके और विदेशी निवेश को ला करके भारत वैश्विक उत्पादन का पावर हाउस बन जाएगा लक्ष्य था कि मैन्युफैक्चरिंग को जीडीपी का 25 फ़ीसदी हिस्सा बनाया जाएगा लेकिन 7 सालों में यह सिर्फ 15% पर अटक गया है इस सेक्टर की सबसे बुरी हालत हुई है और मैन्युफैक्चरिंग मैन्युफैक्चरिंग की नौकरियां पिछले 5 सालों में आधी हो चुकी है।
  6. लगभग एक दशक में निर्यात 300 अरब डॉलर पर अटक गया है हाल यह है की भारत-बांग्लादेश जैसे छोटे प्रतिभागियों से भी पीछे चला गया है।
  7. आधारिक संरचना एक मुश्किल क्षेत्र है मोदी सरकार पिछली सरकार से तेजी से सड़क निर्माण कर रही है पिछली सरकारें प्रतिदिन 8 से 11 किलोमीटर सड़क निर्माण कर पाती थी जबकि मोदी सरकार प्रतिदिन 36 किलोमीटर हाईवे निर्माण कर रही है।

  8. सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा में भारत की क्षमता पिछले 5 सालों में दोगुनी हो गई है वर्तमान में यह क्षमता 100 गीगा वाट की है जोकि 2023 तक 175 गीगा वॉट होने का अनुमान लगाया जा रहा है।
  9. अर्थशास्त्रियों ने प्रधानमंत्री मोदी की अधिकतर लोकलुभावन योजनाओं को स्वीकार किया है इसमें शौचालय बनाना, घरों के लिए कर्ज देना, सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडर और गरीबों को घरों तक पाइप से पानी पहुंचाना शामिल है लेकिन अधिकतर शौचालय इस्तेमाल नहीं हो पा रहे हैं या पानी नहीं है और ईंधन के दाम बढ़ने से सब्सिडी के लाभ को कम कर दिया गया है।

औपचारिक अर्थव्यवस्था में शामिल हुए अधिक लोग -

                         
  1.  डिजिटल पैमेंट के मामले में भारत ने एक वैश्विक नेता के तौर पर छलांग लगाई है। और इसके लिए सरकार समर्थित पेमेंट सिस्टम का शुक्रगुजार होना चाहिए।
  2. प्रधानमंत्री मोदी की जन धन योजना ने करोड़ों गरीब परिवारों को बैंक खातों से जोड़ा और उन्हें औपचारिक अर्थव्यवस्था में जोड़ा हालांकि रिपोर्ट यह भी बताती हैं की कई लोग अब इन अकाउंट का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं।

स्वास्थ्य सेवा पर खर्च निराशाजनक

  1. अर्थशास्त्री रितिका खेड़ा कहती हैं की सरकारी स्वास्थ्य सेवा को लगातार नजरअंदाज करती आई हैं दुनिया भर में भारत ऐसे देशों में शामिल है जहां स्वास्थ्य सेवाओं पर सबसे कम खर्च किया जाता है वहीं मोदी सरकार की लाई गई महत्वकांक्षी योजना स्वास्थ्य बीमा योजना भी कोविड काल के दौरान बहुत कम इस्तेमाल की गई।

कृषि क्षेत्र -

  1.  भारत में काम करने वाली आधी से अधिक जनता कृषि कार्य में लगी हुई है लेकिन इसका जीडीपी में योगदान बहुत कम है लगभग हर कोई यह बात मानता है कि कृषि क्षेत्र में सुधार की आवश्यकता है बाजार समर्थित कृषि कानूनों के लागू करने पर गुस्साए किसानों का इसे लेकर प्रदर्शन जारी है उनका कहना है कि यह कानून उनके आय को कम कर देगा । हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि इन टुकड़े टुकड़े में होने वाले सुधारों से बहुत कम ही फायदा किया जा सकता है।

  2. विशेषज्ञ मानते हैं कि इसका समाधान खेती के बाहर है।खेती तब अच्छा करेगी जब अन्य क्षेत्र उसके अतिरिक्त श्रम बल को अपने में शामिल कर ले। 
  3. सीएमआई के अनुसार यह तभी संभव होगा जब भारत में निजी निवेश मैं बढ़ोतरी देखी जाएगी जोकि अपने 16 सालों में सबसे कम स्तर पर है ।
          और संभवत प्रधानमंत्री मोदी के लिए यह सबसे बड़ी आर्थिक चुनौती है।

धन्यवाद
Read more »

Labels: , , , , ,